सरस्वती-वंदना के बाद एक कवि-उस्ताद ने शास्त्रीय संगीत के तान-पलटों के साथ गीत प्रस्तुत किया। उसके बाद एक कोमल सुकुमार कवि ने बिना घुंघरुओं के ठुमरी और दादरे का रंग जमाया, फिर एक कोयलनुमा कवि ने बिना सारंगी के उर्दू-ग़ज़ल के ढंग पर हिन्दी-ग़ज़ल पेश की और फिर छेड़ी एक भारी-भरकम कवि ने नौटंकी की गायिका की तरह मटककर बहरे तबील। हिन्दी-गीतकारों की यह महफिल पूरे जोबन पर थी, जब स्व0 शम्भूनाथ 'शेष' अपनी दूध-सी मीठी रचना, 'दूध बेचने चली अहीरिन' का बड़े प्यारे अंदाज में पाठ कर चुके थे, तभी एकाएक मंच पर कवियों में खलबली और भगदड़-सी मच गई और शोर सुनाई दिया-''आगई, आगई, बाबूजी की डबल भैंस आगई !''
औरों की देखा-देखी मैं भी जान बचाने के लिए उछल कर एक कोने में दुबक गया और सोचने लगा कि गीतों की इस ताजी महफिल में चीनी के नाजुक बरतनों की दुकान में सांड की तरह यह डबल भैंस कैसे घुस आई ! गीतकारों के बीन जैसे स्वरों से आज तक कोई भैंस आकृष्ट नहीं हुई। यह मधुर संगीत की रसिया भैंस कहां से टपक पड़ी! साहस बखेर कर मैंने अपने छुपने की जगह से (जगह का पता नहीं बताऊंगा) बड़े ध्यान से इधर-उधर देखा। यह क्या ? न तो मंच पर और न ही हॉल में कहीं कोई भैंस थी ! मैं चकराया, अपनी गीतकारोचित कोमलता एवं दुर्बलता पर शर्माया और मंच की ओर बढ़ा। वहां देखता हूं कि कांग्रेसी वर्कर की सादी वेश-भूषा में एक दुबले-पतले सज्जन अत्यंत उद्दंड भाव से बैठे बड़े ही मर्दाना स्वर में अपनी यह कविता सुना रहे हैं-
"ओ बाबूजी की डबल भैंस !
मेरी कुटिया में घुस आई-
वह बाबूजी की डबल भैंस !
वह काली-सी, मतवाली-सी,
क्यों बिना सूचना घुस आई ?
समझा होगा शायद तूने ,
इसको कालिज का खुला मैस !
ओ बाबूजी की डबल भैंस !
मैं जीव-ब्रह्म का भेद, बीच में
माया का पचड़ा लेकर,
चल दिया आज सुलझाने को
युग-युग की विषम समस्याएं।
हैं बाबूजी भी खूब, गले में-
घंटी तलक न बांधी थी?
मैं चौंका, टूटा ध्यान, हाय !
दांतों को भारी लगी ठेस !
ओ बाबूजी की डबल भैंस !"
कहना न होगा गोष्ठी में इस कविता के बाद कोई और कविता न जम सकी। मैदान इस कविता के रचयिता नवागंतुक कवि श्री गोपालप्रसाद व्यास के हाथ रहा। दूसरे दिन दिल्ली के हिन्दी-जगत में यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई कि रात व्यास की भैंस ने दिल्ली के ग़ज़लियों-तबलियों की महफिल तहस-नहस कर दी। इस खबर का अपने राम पर ऐसा असर हुआ कि हम गीत लिखना छोड़कर तुरंत पत्रकार और नाटककार बन गए।