राधा को मैंने आराधा
गांधी से छुट्टी पाने पर।
मर्दों से उठ विश्वास गया,
शास्त्रीजी के उठ जाने पर।
अब नारी का युग आया है,
पुरुषों के पुरखो, सावधान।
नर से लेकर वानर तक की,
आएगी अक्ल ठिकाने पर।
युग योगेश्वर का बीत गया,
दिन मर्यादापति के बीते।
रावण से लेकर रामचन्द्र,
चिल्लाते हैं-सीते ! सीते !!
इसलिए बदलकर अपना स्वर,
मैं 'व्यास' उठाकर अपना कर।
कहता हूं- बन्दो, याद रखो,
नारी के बिना अनारी नर।
पश्चिम की जय ! जिसका प्रकाश
भारत पर बढ़ता आता है।
काली कमली पर सूरदास,
रंग दूजा चढ़ता जाता है। |