मलेरिया के उन्मूलन पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन उसे पता नहीं कि मलेरिया मच्छरों से भी बड़ी तादाद आज हमारे देश में प्रेम के कीटाणुओं की है, लेकिन प्रेम के इन मच्छरों को पहचानने वाली खुर्दबीन अभी तक कहीं तैयार नहीं हुई। मलेरिया का बुखार तो तीन या पांच दिन में जाड़ा देकर उतर भी जाता है, मगर प्रेम का बुखार एक बार चढ़ा तो फिर उतरने का नाम ही नहीं लेता। उसे नष्ट करने वाली कोई कुनैन अभी तक नहीं बनी।
यह मर्ज़ तो मरीज़ को लेकर ही जाता है।
देश के करोड़ों युवक-युवतियां वय प्राप्त होने से पहले ही प्रेम के कुंए में आंख मूंदकर कूद पड़ें। इश्क के जाल में फंसकर अपनी जान दे दें, दर्द से कलेजे को दबाए रहें, आसमान को आहों से गुंजाए रहें, सिसकियों से पड़ोसियों को जगाए रहें, आंसुओं से दामन तर-ब-तर बनाए रहें-यह किसी समाज के लिए, शोभा की बात है ? जब पशुओं की बीमारी के लिए अस्पताल खुले हुए हैं तो प्रेमियों की बीमारी के लिए क्या कुछ नहीं हो सकता ? जब संसार के हर रोग की दवा निकल आई है तो प्रेम के रोग की औषधि का आविष्कार नहीं हो सकता ? कोई इस पर ध्यान दे तो, किसी को इस काम के लिए फुर्सत तो हो ! अजी, ये ऊंचे-ऊंचे बांध, बड़े-बड़े कारखाने, लंबी-चौड़ी योजनाएं सब बेकार हैं, अगर प्रेम के रोग का इलाज न हुआ तो इन्हें चलाएगा कौन ? हमारे नौजवान तो इश्क की तपेदिक में पड़े जैसे-तैसे अपने बाक़ी जीवन की घड़ियां काट रहे हैं। कोई जीना ही नहीं चाहता। कोई इस पर मर रहा है, कोई उस पर जान दे रहा है।
जब सबने ही मरने की ठान ली है तो भाई मेरे, इन योजनाओं का क्या होगा ? उनके दुःख को कौन झेलेगा ? उनके सुख को कौन भोगेगा ? इसलिए अगर देश को मज़बूत बनाना है, उन्नत करना है तो योजनाओं को अलग रखकर पहले प्रेम की बीमारी का इलाज करो। जैसे चेचक, हैजे या प्लेग के टीके निकले हैं, वैसे ही कोई प्रेम का नश्तर भी तलाश करो। जैसे बड़े-बड़े शहरों में अस्पताल खड़े हो रहे हैं, वैसे ही प्रेमियों के इलाज के लिए शफ़ाख़ाने खोलो। जब तक प्रेम के रोग की सफाई नहीं होगी, जब तक आशिकों की आह की दवाई न होगी, जब तक दिल के अनजान फफोले के लिए मरहम तैयार न होगा और जब तक प्रेमियों को रात में आठ घंटे खर्राटे भरने की सुविधा नहीं होगी, तब तक इस देश की दशा नहीं सुधर सकती।
ताजमहल प्रेमियों के इलाज के लिए बेहतरीन सेंटर बन सकता है। हमारा सुझाव है कि फिलहाल एक दर्जन प्रेमियों को परीक्षण के तौर पर ताजमहल में लाकर रखा जाए। ये बारह वर्ष से लेकर बासठ वर्ष तक की उम्र के हों। इनमें आठ प्रेमी तथा चार प्रेमिकाएं हों। इन प्रेमिकाओं को ताजमहल की चार सुर्रियों पर चढ़ा दिया जाए तथा एक-एक सुर्री के नीचे दो-दो प्रेमियों की खाटें बिछा दी जाएं। प्रेमिका ऊपर से कहे- 'हाय, मैं मरी' और प्रेमी नीचे से चिल्लाएं-' हाय, मैं चला।' प्रेमिका ऊपर से कहें-'एक नदी के दो किनारे मिलने से मजबूर'। प्रेमी नीचे से अलापे- 'तुम होकर मेरे पास, हाय कितनी हो मुझसे दूर'। सुर्री के नीचे ताला लगा दिया जाए और ऊपर जहां प्रेमिका खड़ी हो, वहां चारों ओर कांटेदार तार लगा दिए जाएं।
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